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인도

주작이냐 |2026.01.07 16:48
조회 17 |추천 0
कलियुग में पाप का बोलबाला है इसलिए मृत आत्मा की शांति के लिए परिजनों को हाथ जोड़कर प्रार्थना करनी पड़ती है ताकि मृत व्यक्ति की आत्मा बिना किसी कष्ट के अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जाए। पहले ऐसा नहीं था, सतयुग, त्रेता और द्वापर तीनों ही युग में व्यक्ति अधिक सात्विक जीवन जीते थे इसलिए मरणोपरांत उनकी आत्मा स्वत: ही देवगति को प्राप्त हो जाती थी।








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